प्रश्न - प्रयोजनमूलक हिंदी की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर - प्रयोजनमूलक हिंदी, जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, किसी विशेष कार्य के लिए उपयोग की जाने वाली हिंदी है। इसकी कुछ विशेषताएँ निम्न हैं।
प्रयोजन मूलक हिंदी की विशेषताएँ
१) सरल भाषा :- प्रयोजन मूलक हिंदी कठिन और भारी-भरकम शब्दों से बचती है। इसमें वही शब्द प्रयोग किए जाते हैं जिन्हें आम आदमी आसानी से समझ सके। जैसे – "आपका पत्र प्राप्त हुआ" कहना आसान है, जबकि "आपका पत्रान्वेषण किया गया" कहना कठिन लगता है।
२) स्पष्टता :- इसमें कोई भी वाक्य अस्पष्ट या दोहरे अर्थ वाला नहीं होता। लिखने या बोलने का तरीका सीधा और साफ़ होता है। उदाहरण – "मीटिंग कल सुबह 10 बजे होगी" – यह वाक्य स्पष्ट है।
३) संक्षिप्तता :- कम शब्दों में ज़्यादा बात कह देना इसकी खूबी है। इसमें अनावश्यक विस्तार या लंबा विवरण नहीं होता। उदाहरण – "आप कल आ जाइए" कहना आसान है, बजाय इसके कि "यदि आप कल आने का कष्ट करेंगे तो हमें बहुत प्रसन्नता होगी।"
४) व्यावहारिकता :- इसका प्रयोग वास्तविक जीवन और कामकाज में होता है, जैसे सरकारी पत्र, समाचार, विज्ञापन, सूचना-पत्र, रिपोर्ट आदि में।इसलिए इसमें साहित्यिक सौंदर्य या भावुकता की जगह उपयोगिता पर ध्यान दिया जाता है।
५) सुगम्यता :- प्रयोजन मूलक हिंदी ऐसी होती है जिसे हर वर्ग और क्षेत्र का व्यक्ति आसानी से समझ सके। इसमें कठिन संस्कृतनिष्ठ या अति उर्दू-फ़ारसी शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता।
६) वस्तुनिष्ठता :- इसमें केवल तथ्य और आवश्यक जानकारी दी जाती है। व्यक्तिगत भावनाएँ, अलंकार या सजावटी शैली नहीं होती।उदाहरण – "रेलगाड़ी 10 मिनट देरी से आएगी" – इसमें सीधा तथ्य है।
७) उपयोगिता :- इसका मुख्य उद्देश्य काम निकालना और व्यवहारिक संचार करना है। चाहे वह कार्यालयी काम हो, शिक्षा हो, व्यापार हो या मीडिया, हर जगह इसका प्रयोग होता है।
८) लोकप्रियता :- चूँकि यह भाषा आम जनता के निकट होती है, इसलिए यह अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच जाती है। यह जन-संपर्क और जन-संचार के लिए उपयुक्त है।
निष्कर्ष :- संक्षेप में कहा जाए तो प्रयोजन मूलक हिंदी वह भाषा है जो सरल, स्पष्ट, संक्षिप्त और उपयोगी होती है तथा जीवन और कार्यक्षेत्र की ज़रूरतों को पूरा करती है।
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