बिहारी का जीवन परिचय दीजिए ।
बिहारीलाल, जिन्हें बिहारी के नाम से जाना जाता है, हिंदी साहित्य के महान कवि थे। उनका जन्म 1603 ई. में ग्वालियर, मध्य प्रदेश के एक गांव में हुआ था। बिहारी अपनी रचना शैली और दोहों के लिए प्रसिद्ध हैं, विशेष रूप से उनके द्वारा रचित 'बिहारी सतसई' के लिए। इस काव्य ग्रंथ में 700 से अधिक दोहे हैं जो प्रेम, भक्ति, नीति, और जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।
बिहारी ने मुख्य रूप से ब्रज भाषा में रचनाएँ कीं और उनकी शैली में गहन अर्थ की अभिव्यक्ति होती है। उनके दोहे संक्षिप्त होते हुए भी गहरे अर्थ से भरपूर हैं। वे जयपुर के राजा जयसिंह के दरबारी कवि भी रहे और उनके संरक्षण में ही उन्होंने ‘सतसई’ की रचना की।
बिहारीलाल का काव्य न केवल शृंगार रस से ओतप्रोत है बल्कि उसमें नीति और व्यावहारिक ज्ञान भी देखने को मिलता है। उनकी शैली सरल, सटीक और प्रभावशाली थी, जो उनके समय में और आज भी पाठकों और विद्वानों को प्रभावित करती है।
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