प्रश्न - हिन्दी साहित्य में अकविता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - अकविता हिंदी कविता की एक ऐसी धारा है जो परंपरागत कविता के नियमों, बंधनों और मूल्यों का विरोध करती है। यह साठोत्तरी कविता के रूप में भी जानी जाती है, क्योंकि इसका उदय 1960 के दशक में हुआ। अकविता में छंद, लय, तुक और स्थापित काव्य प्रतीकों की अनिवार्यता को अस्वीकार किया जाता है।
अकविता के कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
१) विरोध और अस्वीकृति: यह स्थापित साहित्यिक मानदंडों, सामाजिक मूल्यों और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति विरोध और अस्वीकृति का भाव व्यक्त करती है।
२) अनुभव की प्रामाणिकता: यह कवि के निजी, वास्तविक और कई बार कटु अनुभवों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे-सीधे व्यक्त करने पर जोर देती है।
३) भाषा का अनायास प्रयोग: अकविता में सहज, बोलचाल की भाषा का प्रयोग होता है और पारंपरिक काव्यात्मक भाषा से परहेज किया जाता है।
४) विषयों की विविधता: इसमें रोजमर्रा की जिंदगी के साधारण और असाधारण, सुखद और दुखद, सभी प्रकार के विषयों को स्थान मिलता है।
५) संरचना का अभाव: अकविता में प्रायः कोई निश्चित संरचना या आकार नहीं होता; यह कवि के भावों के प्रवाह के अनुसार विकसित होती है।
निष्कर्ष :- संक्षेप में, कविता जहाँ सौंदर्य और लय के नियमों का पालन करते हुए भावों को व्यक्त करती है, वहीं अकविता इन नियमों को तोड़कर वास्तविकता और अनुभव की तीव्रता को सीधे पाठक तक पहुँचाने का प्रयास करती है। यह एक प्रकार की विद्रोही कविता है जो स्थापित काव्य परंपराओं से मुक्ति चाहती है।
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