Friday, August 29, 2025

प्रयोजनमूलक हिंदी की परिभाषा देते हुए उसके स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।

 

प्रश्न - प्रयोजनमूलक हिंदी  की परिभाषा देते हुए उसके स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।

परिभाषा :

प्रयोजनमूलक हिंदी वह है, जो किसी काम को पूरा करने और संदेश को सरल, साफ और असरदार ढंग से पहुँचाने के लिए प्रयोग की जाती है। इसमें सजावट या अलंकार से ज़्यादा ध्यान सीधे और समझ में आने वाली भाषा पर दिया जाता है।

स्वरूप :

१)सरल और स्पष्ट – इसमें कठिन या भारी-भरकम शब्दों की बजाय आसान शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके।

२)संक्षिप्त – कम शब्दों में ज़्यादा बात कही जाती है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है।

३)कामकाजी भाषा – इसका मुख्य उद्देश्य भावनात्मक सौंदर्य या साहित्यिक आनंद नहीं, बल्कि कामकाज और जानकारी का आदान-प्रदान होता है।

४)व्यावहारिक – इसका प्रयोग प्रशासनिक आदेश, पत्र, समाचार, विज्ञापन, विज्ञान, अनुवाद और रेडियो-टीवी आदि में होता है।

५)उपयोगिता पर बल – इसमें साहित्य की तरह सुंदरता की बजाय काम पूरा करने और जल्दी समझाने पर ज़ोर होता है। इसमें सीधे-सीधे तथ्य और जानकारी दी जाती है।

६) क्षेत्रानुसार प्रयोग – शिक्षा, पत्रकारिता, व्यापार, पर्यटन और कंप्यूटर, चिकित्सा , विज्ञान जैसे क्षेत्रों में यह बहुत ज़रूरी हो गई है। इसके अलावा बैंक, उद्योग, परिवहन और सरकारी विभागों में भी यही भाषा सबसे अधिक काम आती है।

७) समयानुकूलता – यह बदलते समाज और तकनीक के साथ स्वयं को ढालती है। नए वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दों को अपनाकर यह और अधिक प्रासंगिक बनती है।

८) सरकारी और व्यावसायिक महत्व – भारत में हिंदी राजभाषा है, इसलिए शासकीय कामकाज और व्यावसायिक संचार में प्रयोजनमूलक हिंदी का विशेष महत्व है।

निष्कर्ष :

अतः साफ है कि प्रयोजनमूलक हिंदी आज के समय की ज़रूरत है। यह हिंदी को केवल साहित्य तक सीमित नहीं रखती, बल्कि जीवन के हर कामकाज में उपयोगी बनाती है। इससे हिंदी अधिक  असरदार और आधुनिक बनती है। 



  




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