Sunday, February 16, 2025

प्रश्न - “राष्ट्र जागृति की आवश्यकता” इस भजन के माध्यम से तुकडोजी महाराज क्या संदेश देना चाहते हैं? यह स्पष्ट कीजिए।

 प्रश्न - “राष्ट्र जागृति की आवश्यकता” इस भजन के माध्यम से तुकडोजी महाराज क्या संदेश देना चाहते हैं? यह स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर 

संदर्भ - प्रस्तुत पंक्तियां हमारी पाठ्य-पुस्तक लहर की बरखा के “राष्ट्र जागृति की आवश्यकता” से उद्धृत की गई है। इन पंक्तियों के कवि राष्ट्रीय संत तुकडोजी महाराज है। जो कि एक महान समाज सुधारक भी थे।


प्रसंग - प्रस्तुत पंक्तियों में तुकडोजी महाराज ने इस भजन के माध्यम से यह बताया कि लोगों को राष्ट्र को जागृत करने की आवश्यकता होगी। और हम सबको एक जूट होकर का यह काम करना होगा। हमें इस देश को जागृत करना ही होगा यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है।


व्याख्या या भावार्थ - तुकडोजी महाराज कहते हैं कि तुम जहां भी जाओ। चाहे वह घर का वास्तु हो या शादी विवाह हो अथवा जहां पर अधिक से अधिक लोग हो वहां पर राष्ट्र को जागृत करने की बातें करना चाहिए। या फिर किसी की जयंती हो या पुण्यतिथि हो या सम्मेलन हो वहां पर भी हमें राष्ट्र जागृति की बातें करना चाहिए। या फिर किसी का दसवां हो यह नामकरण हो अथवा जहां पर अधिक से अधिक लोग रहते हो वहां पर हमें देश को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए। हमें राष्ट्र जागृति के लिए गुहार लगाना है। हमारा उद्देश्य भी यही होना चाहिए। हमें लोगों को यह संदेश देना है कि अब हमें हमारे राष्ट्र को उन्नत करना है और हम सभी को उसी रास्ते पर चलना चाहिए 


                    तुकडोजी महाराज कहते हैं कि राज कर्ताओं को और पक्ष पार्टियों को मैं नहीं मानता। क्योंकि मैं सच्चाई का पुजारी हूं। सत्य ही मेरा भगवान है। सबको एक साथ लाना और समझ में राष्ट्र जागृति लाना ही मेरा प्रथम उद्देश्य है। यह मेरा गुरु मंत्र है। इंसान बनकर हमें प्रेम करना चाहिए यही हमारा काम है। 

             तुकडोजी महाराज कहते हैं कि यह जो हिंदू है वह आपस में लड़ाई कर रहे हैं। उन्हें आपस में लड़ने से कुछ नहीं मिलेगा। तुम्हें अपने बुद्धि का उपयोग करके एकजुट होकर राष्ट्र को जागृत करने मे अपनी शक्ति को लगाना चाहिए। आपस में झगड़ा करने से कुछ हासिल नहीं होता और झगड़े को कम करना चाहिए। हमारा तो सब कुछ चला गया जो कुछ हमारे पास बचा है उसे संभाल कर रखना चाहिए। तभी हमारे धर्म का भला होगा। यह बात हम सबको बड़े ध्यानपूर्वक समझ लेना चाहिए और राष्ट्र को उन्नत करने का काम करना चाहिए। 

                       संत तुकडोजी जी महाराज कहते हैं कि हमें इन सब विदेशियों को अपने काबू में लाना चाहिए। अपनी शक्ति को इसके लिए हमें बढ़ाना होगा। सभी को अपने चरित्र, नीति, धर्म को एक बाजू में रखकर सबको एक साथ आकर इनका सामना करना चाहिए। भारतीयों को और अधिक जागृत के साथ और होशियार होना होगा और इन कपटी लोगों से सावधान रहना होगा। 

                        तुकडोजी महाराज कहते हैं कि बहुत से लोग कहते हैं कि हमने गंगा नहा लिया है। लेकिन वह गंगा नहाते नहीं हैं। और देश के लिए कुछ करते भी नहीं है और कहते हैं कि हम इस देश को देशवासी हैं और हम इस देश की रक्षा करेंगे। सब लोग सिर्फ भाषण देना चाहते हैं। जो कहते हैं कि लड्डू क्या बनेगा जब तक मुंह के अंदर जाता नहीं उसका स्वाद हमें पता नहीं चलता। वैसे ही हम जब तक कोई काम नहीं करते हमें उसके बारे में पता नहीं चलता। बहुत से लोग लड़ाई नहीं करते लेकिन वह अपने आप को वीर कहते हैं और वे कहते हैं हमने ये किया वो किया। 

         संक्षेप में यदि हम कहना चाहेंगे तो हमें राष्ट्र जागृति के लिए एक साथ आना होगा।

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